Savitribai Phule – Rani Velu Nachiyar

बुधवार 3 जनवरी 2024 को पीएम मोदी ने Savitribai Phule व Rani Velu Nachiyar को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी और कहा कि दोनों ने अपनी करुणा और साहस से समाज को प्रेरित किया है। आइए सावित्रीबाई फुले व वेलु नचियार के जीवन के बारे में जानते हैं।

Savitribai Phule

प्रारंभिक जीवन: Savitribai Phule का जन्म 3 जनवरी, 1831 को नायगांव , महाराष्ट्र, भारत में हुआ था। उनके माँ का नाम लक्ष्मी और पिता का नाम खंडोजी नेवासे पाटील था। सावित्रीबाई एक किसान परिवार से थीं और उनका प्रारम्भिक जीवन आर्थिक परेशानियों और सामाजिक चुनौतियों से भरा हुआ था। वे एक समाज सुधारक, शिक्षक और कवि थी। उनको ‘भारत की पहली महिला शिक्षिका’ भी कहा जाता है। वह भारत में महिला शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी थीं।

1840 में सावित्रीबाई का विवाह ज्योतिराव फुले से हो गया। विवाह के समय सवित्रीबाई को लिखना पढ़ना नहीं आता था। ज्योतिराव ने उनको पढ़ना व लिखना सिखाया। इस प्रकार उनकी प्राइमेरी शिक्षा घर पर हुई।
सावित्रीबाई व ज्योतिराव फुले की कोई संतान नहीं थी, ऐसा कहा जाता है कि वे यशवंत नाम के एक बच्चे को अपने घर ले आए थे, जो एक विधवा ब्राह्मणी का बेटा था।
ज्योतिराव फुले सामाजिक सुधार आंदोलन के एक प्रमुख व्यक्ति थे। उन्होंने शिक्षा और सामाजिक समानता पर सावित्रीबाई के विचारों को आकार देने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।

महिला शिक्षा में योगदान: Savitribai Phule का लड़कियों और महिलाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण स्थान था। 1848 में उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर पुणे में लड़कियों के लिए पहला स्कूल स्थापित किया। लोगों के विरोध और सामाजिक बहिष्कार का सामना करते हुए भी सावित्रीबाई ने शिक्षा के द्वारा महिलाओं के उत्थान के लिए अपने प्रयास जारी रखे। लोगों के विरोध को देखते हुए ज्योतिरव के पिता ने उनको घर से निकाल दिया क्योंकि उनका कहना था कि ज्योतिराव जो कार्य कर रहे हैं वह मनुस्मृति के अनुसार पाप है।

इस सबके बावजूद उन्होंने कुल 18 स्कूल खोले और बहुत सी जातियों के बच्चों को पढ़ाया। इसके अतिरिक्त सावित्रीबाई और ज्योतिराव फुले ने दो शैक्षिक ट्रस्टों की स्थापना की तथा बलात्कार पीड़ित जोकि गर्भवती भी होती थीं, उनके लिए ‘बालहत्या प्रतिबंधक गृह’(Balhatya Pratibandhak Griha) नाम का एक देखभाल केंद्र भी खोला।

कविता और लेखन: सावित्रीबाई एक कुशल कवयित्री और लेखिका भी थीं, जिन्होंने अपनी इस प्रतिभा का उपयोग महिलाओं को सामाजिक न्याय और उनके अधिकारों की रक्षा करने के लिए किया था। उन्होंने अपनी कविताओं में जातिगत भेदभाव, लैंगिक असमानता और समाज में महिलाओं की दुर्दशा जैसे अनेक बातों पर विचार व्यक्त किए।
सामाजिक सुधार: सावित्रीबाई फुले ने उत्पीड़ित जातियों और महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किया। उन्होंने सामाजिक सुधार आंदोलनों में सक्रिय रूप से भाग लिया। उन्होंने जातिगत भेदभाव को मिटाने और समाज के उत्थान के लिए अथक प्रयास किया।

मृत्यु और विरासत: 10 मार्च, 1897 को सवित्रीबाई फुले का निधन हो गया। शिक्षा, सामाजिक सुधार और साहित्य में उनके महत्वपूर्ण योगदान के कारण वे सदैव जीवित रहेंगी। सावित्रीबाई का चरित्र प्रेरणादायक हैं, खासकर उन लोगों के लिए जो भारत में महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक समानता की वकालत करते हैं।

Rani Velu Nachiyar

प्रारंभिक जीवन: रानी वेलु नचियार (3 जनवरी 1730) तमिलनाडु के रामनाथपुरम में जन्मी एक साहसी रानी और योद्धा थीं। वे शिवगंगा एस्टेट (जिसे Kingdom of the Lesser Marava के नाम से भी जाना जाता है।) की रानी थी। रानी वेलु नचियार रामनाद साम्राज्य के राजा चेल्लामुथु विजयरागुनाथ सेतुपति और रानी सकंधीमुथथल की एकमात्र संतान थीं। उनका विवाह मुथु वदुगनाथ पेरिया से हुआ था।
रानी नचियार युद्धकला में पारंगत थी व बहुत सी भाषाओं की विद्वान थी।

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ लड़ाई: Rani Velu Nachiyar को 18वीं शताब्दी के दौरान ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ विरोध करने के लिए जाना जाता है। अपने पति की मृत्यु के बाद जब अंग्रेजों ने उनका राज्य हड़प लिया,तब उन्होंने मराठों से शरण मांगी।इसके पश्चात बहुत लोगों के समर्थन व आठ वर्षों की योजना के बाद उन्होंने East India Company के विरूद्ध युद्ध किया।
जिस युद्ध में उन्होंने अपने वफादार कमांडर कुयिली(Kuyili ) का उपयोग आत्मघाती बमबारी(suicide bombing) जैसे अपरंपरागत तरीके के लिए किया। Kuyili ने ब्रिटिश गोला-बारूद डिपो को नष्ट करने के लिए अपने जीवन का बलिदान दे दिया।

शिवगंगा पर पुनः कब्ज़ा : इस प्रकार रानी वेलु नचियार(Rani Velu Nachiyar) ने अपनी राजधानी शिवगंगा को अंग्रेजों से वापस प्राप्त कर लिया और दस वर्षों तक और शासन किया।

मृत्यु और विरासत: 1790 में उन्होंने अपनी बेटी को अपना उत्तराधिकारी बना दिया व 25 दिसम्बर 1796 को उनकी मृत्यु हो गई। रानी वेलु नचियार अपने राज्य के लिए किए गए प्रयासों और बलिदान के कारण भारतीय इतिहास में अमर हो गईं। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ संघर्ष में रानी वेलु नचियार के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है।

भारत की पहली महिला शिक्षिका का क्या नाम है ?

भारत की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले थीं।

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