Five Generations of Computer

दोस्तों, इस आर्टिकल में हम कम्प्यूटर की पाँचों Generations की विशेषताओं व कैसे इन पीढ़ियों(Generations of Computer) में धीरे-धीरे इस इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का विकास हुआ, इस बारे में जानेगें।

ऐसा माना जाता है कि कंप्यूटर का विकास 16 वीं शताब्दी के आसपास हुआ था। कंप्यूटर की शुरूआत एक विशाल इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के रूप में हुई थी, जिसमें वैक्यूम ट्यूब्स का प्रयोग किया गया था। बाद में समय के साथ-साथ उन विशाल कम्प्यूटरों के स्थान पर वर्तमान प्रणाली के छोटे कम्प्यूटरों ने स्थान ले लिया।

पहले पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर का आविस्कार 1930 के दशक में हुआ था, और तब से, कंप्यूटर और उससे संबंधित उपकरणों का विकास बराबर हो रहा है।

आज हम जिस कंप्यूटर का प्रयोग करते हैं, वह बहुत से बदलावों के बाद अस्तित्व में आया है। कम्प्यूटर को ऐबैकस(Abacus) का एडवांस्ड वर्ज़न कहा जाता है।

Generations of Computer

Generations of Computer

कंप्यूटर में, “Generation” शब्द का प्रयोग प्रायः कम्प्यूटर को उनके हार्डवेयर के अनुसार अलग-अलग करने के लिए किया जाता था, लेकिन आज के समय में इसमें हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों को शामिल कर सकते हैं क्योंकि कंप्यूटर सिस्टम को बनाने के लिए दोनों की ही आवश्यकता होती है।

कंप्यूटर की कुल पांच जनरेशन मानी जाती हैं, प्रत्येक पीढ़ी/जनरेशन में कंप्यूटर सिस्टम के कार्य करने के तरीकों और उपयोग में सुधार के लिए कुछ न कुछ नया खोजा गया था। कंप्यूटर की पांचों पीढ़ियों और उन सभी को विशेषताओं के बारे में जानकारी निम्नलिखित है।

फर्स्ट जनरेशन (वैक्यूम ट्यूब) – (1940-1956)

  1. इस पीढ़ी के कंप्यूटर Machine Language(0 और 1 की भाषा) पर निर्भर थे।
  2. इनको वैक्यूम ट्यूब का उपयोग करके डिजाइन किया गया था।
  3. इस समय के कम्प्यूटरों का आकार बहुत बड़ा था व इनको रखने के लिए लगभग एक कमरे के बराबर जगह चाहिए होती थी।
  4. इन कम्प्यूटरों में बहुत अधिक बिजली कनज़्यूम होती थी।
  5. इस Generation के कम्प्यूटरों की स्पीड बहुत कम थी।
  6. इन कंप्यूटरों में इनपुट/आउटपुट उपकरणों के रूप में पेपर टेप और पंच कार्ड का उपयोग किया जाता था।
  7. इनको मैनेज करने में बहुत अधिक खर्च करना पड़ता था।
  8. यह मल्टीटैस्किंग(multitasking) नही कर पाते थे अर्थात एक समय में एक ही कार्य कर सकते थे।
  9. इनमें मॉनीटर का प्रयोग नहीं होता था। आउटपुट के लिए प्रिन्टआउट का इस्तेमाल किया जाता था।

इस Generation के मुख्य कंप्यूटरों के नाम इस प्रकार हैं –

ENIAC – Electronic Numerical Integrator And Calculator
UNIVAC– Universal Automatic Computer
EDSAC – Delay Storage Automatic Calculator
EDVAC – Electronic Discrete Variable Automatic Computer

सेकेंड जनरेशन (ट्रांजिस्टर्स) – (1956-1963)

कंप्यूटर की दूसरी पीढ़ी ने कम्प्यूटर जगत में क्रांति ला दी क्योंकि इसमें भारी वैक्यूम ट्यूबों के बजाय ट्रांजिस्टर की तकनीक का उपयोग प्रारंभ हो गया था। पहली बार ट्रांजिस्टर का आविष्कार 1947 में किया गया था, लेकिन 1950 के दशक तक कंप्यूटर में इसका उपयोग कभी नहीं किया जा सका। ट्रांजिस्टर का आविष्कार बेल लैब्स में किया गया था।

दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटरों के लिए उपयोग की जाने वाली प्रोग्रामिंग भाषाएं फोरट्रान (1956), ALGOL (1958), और COBOL (1959) थीं।

इस जनरेशन की मुख्य विशेषताएं इस पकार हैं –

  • ट्रैन्ज़िस्टर की स्पीड कम्प्यूटर की स्पीड को निर्धारित करती थी।
  • ट्रैन्ज़िस्टर के उपयोग के कारण इनमें बिजली की खपत भी कम होती थी।
  • यह कम्प्यूटर फर्स्ट जनरेशन के कम्प्यूटर की तुलना में सस्ते थे।
  • कंप्यूटर की दूसरी पीढ़ी में सीपीयू, मेमोरी और इनपुट / आउटपुट इकाइयों के उपयोग की भी शुरुआत हुई।
  • इस Generation में भी आउटपुट प्रिन्टआउट के रूप में ही होता था।
  • Machine language के स्थान पर Assembly language का इस्तेमाल होने के कारण कम्प्यूटर अब शब्द को समझने लगे थे।
  • Low-level प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के स्थान पर High Level प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का इस्तेमाल होने लगा था।
  • इस जनरेशन में FORTRAN व COBOL लैंग्वेज को व्यावसायिक उपयोग के लिए विकसित किया गया था।
  • Magnetic tape व punched cards का उपयोग इनपुट / आउटपुट डिवाइसेस के रूप में होता था।
  • इस Generation के कुछ उदाहरण हैं – PDP-8, IBM1400 series, IBM 7090 and 7094, UNIVAC 1107, CDC 3600 आदि

थर्ड जनरेशन (इंटीग्रेटेड सर्किट) – (1956-1963)

तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटरों में ट्रांजिस्टर्स का आकार छोटा हो गया था और उनको सिलिकॉन चिप पर प्लेस कर दिया गया था, जिसे आईसी भी कहा जाता है। इससे कंप्यूटर की स्पीड बढ़ गई थी। एक सिंगल आईसी में सिलिकॉन चिप पर कई ट्रांजिस्टर, रजिस्टर और कैपेसिटर होते थे। इस समय इनपुट और आउटपुट के लिए कीबोर्ड और मॉनिटर का उपयोग शुरू हो गया था।

कंप्यूटर की तीसरी पीढ़ी की विशेषताएं निम्न वर्णित हैं:

  • इन कम्प्यूटरों में इंटीग्रेटेड सर्किट का उपयोग किया गया था, जिनमें छोटे सर्किट बड़े सर्किट की तरह कुशलता से काम कर सकते थे।
  • थर्ड जनरेशन के कम्प्यूटर मल्टीटैस्किंग भी कर सकते थे।
  • मॉनिटर की मेमोरी के आधार कम्प्यूटर के कार्य निर्भर थे।
  • यह आकार में छोटे होते थे।
  • कंप्यूटर की इस पीढ़ी के कुछ उदाहरण PDP 8, IBM 360, ICL 2900, PDP-11, NCR 395, B6500, UNIVAC 1108 आदि हैं।
  • इन कंप्यूटरों में High-level programming languages उपयोग किया जाता था।
  • मैग्नेटिक टेप, प्रिंटर, मॉनिटर, कीबोर्ड, आदि का प्रयोग इनपुट / आउटपुट डिवाइसेस के रूप में किया जाता था।

फोर्थ जनरेशन (माइक्रोप्रोसेसर)- (1956-1963)

फोर्थ Generation तक टेक्नॉलजी बहुत एडवांस्ड हो गई थी इसलिए इस समय अधिकतम विकास हुआ।

इस पीढ़ी की विशेषताएं नीचे दी गई हैं:

  • Ted Hoff ने पहला माइक्रोप्रोसेसर, इंटेल 4004 चिप खोजा था और 1971 में यह व्यावसायिक रूप से उपलब्ध हो गया था। यही समय था जब पर्सनल कंप्यूटर की शुरुआत हुई।
  • लैपटॉप और टैबलेट भी इस पीढ़ी में ही आए।
  • GUI(ग्राफिकल यूजर इंटरफेस) भी इसी समय विकसित हुआ।
  • इस समय के कम्प्यूटरों में लाखों ट्रांजिस्टर सिलिकॉन सर्किट पर रखे जा सकते थे।
  • चौथी पीढ़ी में, कंप्यूटर आकार में बहुत छोटे हो गए थे और पोर्टेबल भी हो गए थे।
  • कंप्यूटर की स्पीड, मेमोरी और स्टोरेज आदि में सुधार इस पीढ़ी में हुआ था।
  • मल्टीप्रोसेसिंग, मल्टीप्रोग्रामिंग व वर्चुअल मेमोरी आदि कई प्रकार टेक्नॉलजी भी इसी समय आईं।
  • इस जनरेशन में RAM व ROM आदि का भी प्रयोग होने लगा था।
  • इस Generation के कंप्यूटरों के उदाहरण हैं Apple II, पहला IBM कंप्यूटर, STAR 1000 आदि।

फ़िफ्थ जनरेशन (आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस) – (1956-1963)

फ़िफ्थ जनरेशन की विशेषताएं निम्न हैं –

  • AI(Artificial intelligence) का इस्तेमाल होने लगा। जिसे वर्तमान में डिवाइसेस में उपयोग किया जा रहा है, जिसके कारण कुछ ही सेकंड में लाखों कार्यों को पूरा किया जा सकता है।
  • लैपटॉप, पामटॉप आदि पहले से अधिक विकसित हो गए।
  • बहुत सी Robotic डिवाइसेस का प्रयोग होने लगा।
  • इस जनरेशन की डिवाइसेस सस्ती, फास्ट, बिजली कम इस्तेमाल करने वाली, उपयोग करने में आसान तथा पोर्टेबल हैं।
  • इस Generation के कम्प्यूटर साइज़ में छोटे हैं।
  • इस जनरेशन में इनपुट /आउटपुट डिवाइस के रूप में टचपैड, टचस्क्रीन, पेन, स्पीच इनपुट, लाइट स्कैनर, प्रिंटर, कीबोर्ड, मॉनिटर, माउस, आदि का उपयोग किया जाता हैं।
  • Desktops, laptops, tablets, smartphones आदि इस जनरेशन के उदाहरण हैं।

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