Rakshabandhan कब है ?

“रक्षाबंधन”(Rakshabandhan), जिसका शाब्दिक अर्थ है सुरक्षा का बंधन। इसे भारत के विभिन्न हिस्सों में राखी के नाम से भी जाना जाता है।

इसे कई अलग – अलग राज्यों में अलग – अलग नामों से भी जाना जाता है जैसे कि गाम्हा पूर्णिमा – उड़ीसा में, नारली पूर्णिमा- पश्चिमी भारत में, जंध्यम पूर्णिमा- उत्तराखंड में, कजरी पूर्णिमा- मध्य भारत में और बंगाल में झूलन पूर्णिमा।

Rakshabandhan

Rakshabandhan Date & Time :

रक्षा बंधन जल्द ही 30 व 31 अगस्त, 2023 को मनाया जाने वाला है। हर साल, यह पर्व श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।
राखी (रक्षाबंधन) पूर्णिमा की शुरुआत 30 अगस्त 2023 को सुबह 10:58 बजे
राखी (रक्षाबंधन) पूर्णिमा का समापन 31 अगस्त 2023 सुबह 07:05 बजे

लेकिन इस साल पूर्णिमा के साथ ही भद्राकाल का भी प्रारंभ हो जाएगा। भद्राकाल में रक्षाबंधन मनाना शुभ नहीं माना जाता है, अतः भद्राकाल समाप्त होने पर ही राखी बांधनी चाहिए।

Rakshabandhan या राखी भारत में सबसे लोकप्रिय त्योहारों में से एक है। यह भाई और बहन के बीच सुरक्षा के बंधन का प्रतीक है। बहनें अपने भाइयों की दाहिनी कलाई में धागा बांधकर उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। यह उनके भाइयों के लिए उनके प्यार का संकेत है। जबकि भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं व बहनों की रक्षा का संकल्प लेते हैं। हाल के दिनों में राखी सभी के प्रति दोस्ती और सद्भावना के बंधन का प्रतीक बनकर भी दिखने लगी है ।

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वैसे तो Rakshabandhan का त्योहार हर साल आता है लेकिन फिर भी इसका इंतजार सभी को होता है। लोग इस प्यारे उत्सव का हिस्सा बनने के लिए भारत के साथ-साथ दुनिया के अन्य हिस्सों में राखी भेजते हैं। राखी का धागा प्यार, स्नेह, देखभाल, सम्मान और आराधना का प्रतीक है, जो भाई-बहन एक-दूसरे के लिए अपने दिल में रखते हैं।

rakshbandhan

जैसा कि हम सभी यह जानते हैं कि राखी(Rakshabandhan) का त्योहार भाई-बहन को समर्पित है, इसलिए बहनें और भाई इस विशेष दिन के जल्द आने का इंतजार करते हैं और इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे उस समय कहां है। हर व्यक्ति इस खूबसूरत दिन पर बहनों और भाइयों के बीच के इस प्यारे बंधन का जश्न मनाने के लिए एकजुट हो जाता है।

Rakshabandhan की उत्पत्ति की व्याख्या करने वाली कई अलग-अलग किंवदंतियां हैं। कुछ मामलों में वे पौराणिक हैं जबकि कुछ में वे ऐतिहासिक हैं।

हिंदू शास्त्रों के अनुसार, जब एक बार राक्षसों ने देवताओं के राजा इंद्र को हराया, तो राजा इन्द्र की पत्नी इंद्राणी ने उनकी कलाई पर पवित्र पीला धागा बांध दिया। इसकी सुरक्षा से दृढ़ होकर, वे पुनः युद्ध करने और युद्ध जीतने के लिए चले गए ।

देवी लक्ष्मी ने राक्षस राजा बालि की कलाई पर राखी बांधकर भगवान विष्णु की वापसी का अनुरोध किया, जो बालि के द्वार की रखवाली कर रहे थे।

महाभारत के अनुसार, एक बार रानी द्रौपदी ने कृष्ण की उंगली से बहते रक्त को रोकने के लिए अपनी साड़ी को चीर कर एक टुकड़ा कृष्ण की कलाई पर बांधा था। कृष्ण इस बात से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने घोषणा की, कि इस कार्य ने उन्हें द्रौपदी का भाई बना दिया है और अब उनकी रक्षा करने की जिम्मेदारी उनकी है। जिसे उन्होंने द्रौपदी की बार-बार रक्षा करके पूरा भी किया।

Rakshabandhan भाईचारे और दोस्ती का प्रतीक भी है। जिसका प्रयोग भारत में ऐतिहासिक काल से दोस्ती और भाईचारे को दर्शाने के लिए किया जाता रहा है। राजपूत रानियाँ अपने पड़ोसी राजाओं को मित्रता करने के लिए राखी भेजती थीं।

नोबेल पुरस्कार विजेता कवि रवींद्रनाथ टैगोर ने रक्षा बंधन को एकता के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया। बंगाल को सांप्रदायिक आधार पर विभाजित करने की ब्रिटिश रणनीति पर इसका बहुत प्रभाव पड़ा।

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